जिस रोज मुझे भगवान मिले

‘ना माया से ना शक्ति से भगवन मिलते हैं भक्ति... 

जिस रोज मुझे भगवान मिले

आवारा पागल दीवाना यानि परफेक्‍ट लवर

क्‍या वक्‍त आ गया है, जिस बारे में... 

आवारा पागल दीवाना यानि परफेक्‍ट लवर

अगर तुम ना होते

मैं इस नाम की फिल्‍म की बात नहीं करने जा रहा बल्‍िक एक... 

अगर तुम ना होते

मेरी भैंस को डंडा क्‍यों मारा

यहाँ महमूद का गाया कोई गीत नही सुनाया जा... 

मेरी भैंस को डंडा क्‍यों मारा

IPL T20 यानि क्रिकेट का Item Song

वैसे तो IPL खत्म भी हो गया है और कमाने वालों का पैसा अभी हजम होना चालू है, और अभी तक इस विषय में काफी कुछ लिखा और पढ़ा जा चुका होगा। लेकिन जब सास-बहू, शादी-बरबादी, वो ही घर वो ही कहानी टाईप कहानियों पर बने सीरियल बार बार देखे जा सकते हैं तो हमने [...]

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एक पगली मेरा नाम जो ले, शरमाये भी, घबराये भी

एक पगली मेरा नाम जो ले, शरमाये भी, घबराये भी

मैं तब अल्मोड़ा में था जब गुलाम अली का ये एलबम निकला था, लाला बाजार में घूमते हुए अक्सर इसकी एक गजल जो सुनायी पड़ती थी, वो थी - एक पगली मेरा नाम जो ले, शरमाये भी, घबराये भी। तब गुलाम अली की गजलें मुझे इतनी पसंद नही थी लेकिन फिर भी ना जाने क्यूँ [...]

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फिल्म समीक्षाः धर्म

फिल्म समीक्षाः धर्म

This summer do yourself a favour and watch this film Dharm. वैसे तो 2007 में रीलिज हुई इस फिल्म की समीक्षा का अब उतना कोई औचित्य नही है लेकिन फिर भी अच्छे सिनेमा के लिये तारीफ के दरवाजे कभी भी खोले जा सकते हैं। फिल्म धर्म का निर्देशन किया है भावना तलवार ने जो उनकी [...]

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ब्लोगर की कहानी एक पोस्ट की जुबानी

मेरी ये पोस्ट उन तमाम लोगों को समर्पित है जो कुछ ना कुछ लिख रहे हैं, चाहे किसी चिट्ठे की किसी पोस्ट के रूप में या कही किसी चिट्ठे में टिप्पणी के रूप में। किसी एवार्ड की चाह में या निर्विकार भाव में, चाहे उनकी पोस्ट किसी को भाये या खुद ही देख मंद मंद [...]

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Teen Pregnancy: इस फर्क का मतलब समाज की रजामंदी नही

मैने पिछली पोस्ट में बताया था कि यहाँ अमेरिका के एक शहर में हाईस्कूल में पढ़ने वाली १६ से १७ साल के बीच की १७ लड़कियों ने आपस में करार किया कि एक साथ Pregnant होते हैं और अब वो १७ लड़कियाँ Pregnant भी हो गयी है। इस घटना ने यहाँ एक नही बहस को [...]

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मसंद, Viewers की पसंद जाने तू या जाने ना

मसंद, Viewers की पसंद जाने तू या जाने ना

एक व्यक्ति हैं राजीव मसंद जो IBNLive पर फिल्मों की क्रिटिक्सगिरी यानि आलोचना (शायद मुझे समीक्षा कहना चाहिये) करते हैं, वैसे ही जैसे अपने चवन्नी छाप यानि अजय ब्रह्मात्मज (जाने तू अब्बास की जुबानी, इस फिल्म पर छवन्नी की छाप)।
उनके द्वारा समीक्षा की गयी कई फिल्में जिन्हें उन्होंने अच्छा बताया (४ स्टार टाईप) वो [...]

एक पगली मेरा नाम जो ले, शरमाये भी, घबराये भी

एक पगली मेरा नाम जो ले, शरमाये भी, घबराये भी

मैं तब अल्मोड़ा में था जब गुलाम अली का ये एलबम निकला था, लाला बाजार में घूमते हुए अक्सर इसकी एक गजल जो सुनायी पड़ती थी, वो थी - एक पगली मेरा नाम जो ले, शरमाये भी, घबराये भी। तब गुलाम अली की गजलें मुझे इतनी पसंद नही थी लेकिन फिर भी ना जाने क्यूँ [...]

कबीरा खड़ा बाजार में: कबीर दास और उनके दोहे

ना काहू से दोस्ती ना काहू से बैर कहने वाले कबीर दास जैसा व्यक्तित्व शायद ही किसी और हिन्दी साहित्यकार का होगा। स्कूल के वक्त भी वो कबीर और उनके दोहे ही थे जो आसानी से समझ में आते थे। उनका व्यक्तित्व अनुपम तो था ही लेकिन उनके जन्म को लेकर कई किंवदन्तियाँ भी प्रचलित [...]

हट जा ताऊ पाछे णे

हो सकता है आप कुछ और कहते हो लेकिन हम तो ताऊ ही कहते हैं और यही कहेंगे भोत हो लिया ताऊ, बहुत चला ली अपणी, अब तू निकल ले पाछेणे और हमें स्टेज संभालने दे।

ये गीत सबसे पहले अभी कुछ दिनों पहले एक पार्टी में सुना था और आज कुछ ढूँढते हुए हमें मिल [...]

विडियो श्रृंखलाः वो कागज की कश्ती वो बारिश का पानी - 3

वो सॉरी बोल रहा है। याद आया कुछ, अगर नही तो इस बार पेश है एक बहुत ही प्यारी क्लिपिंग। साथ में है सरप्राइज जिसे शायद बहुत कम ही जानते होंगे, मुझे भी नही पता था।
अच्छा कोकाकोला, पेप्सी और थम्सअप के अलावा कौन सा ड्रिंक आपको याद है, दिमाग पर जोर डालिये क्या पता कोई [...]

विडियो श्रृंखलाः वो कागज की कश्ती वो बारिश का पानी - 2

अपना देश अनेकता में एकता का बड़ा अच्छा उदाहरण है, अनेकता में एकता की बात करें तो याद आता है एक-अनेक वाला विडियो इसके बाद कुछ और कहने की जरूरत ही नही है।

और अगर आपको जंगल में चड्डी पहन कर खिले हुए फूल को देखे जमाना हो गया है तो आज वो भी देख लें

आज [...]

विडियो श्रृंखलाः वो कागज की कश्ती वो बारिश का पानी

आज से हम शुरू कर रहे हैं एक विडियो श्रृंखला जिसमें टेलिविजन की दुनिया में दिखाये गये कुछ सीरियलों और विज्ञापनों के अंश दिखायेंगे। ये वो सीरियल हैं जो वक्त में खत्म हुआ करते थे जिनकी कहानियों में अंत होता था ना कि आजकल के कभी ना खत्म होने वाली बकवास भरे सीरियल। ये वो [...]